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कविता: फर-फर हवा
Sarangi: Lesson 17
Goalहवा की कविता सुनना, आवाज़ वाले शब्द पहचानना और हवा के बारे में बोलना।
New words
हवा · जो दिखती नहीं पर महसूस होती हैझूमना · मस्ती में हिलनाफैलाना · खोलकर दूर तक रखनाटकराना · किसी से छू जानाठंडक · हल्की ठंड का एहसास
Explanation
हवा हमें दिखती नहीं है, पर हम उसे महसूस करते हैं। जब हवा चलती है तो पत्ते हिलते हैं और कपड़े लहराते हैं। हवा की आवाज़ को हम 'फर-फर' जैसे शब्दों में बोलते हैं। कविता सुनो और अंत की एक-सी आवाज़ ढूँढो।
फर-फर फर-फर हवा आई,
सूखते कपड़ों से टकराई।
पेड़ों के पत्ते झूम उठे,
नन्हे फूल भी घूम उठे।
मैंने दोनों हाथ फैलाए,
हवा के संग हम मुस्काए।
Worked examples
हवा और उसका असर देखो।
तुक वाले शब्द सुनो।
हवा चलती है तो तुम क्या करते हो? बताओ।
Class activity
हवा पकड़ो। खुली जगह में हर बच्चा एक रिबन या पतली काग़ज़ की पट्टी लेकर खड़ा हो। देखो कि हवा किस तरफ़ पट्टी को उड़ाती है। फिर मुँह से फूँककर पट्टी को हिलाओ। हवा तेज़ हो या धीमी, बच्चे बोलें: फर-फर या सर-सर।
Practice
1
सुनो। हवा से क्या जल्दी सूख गया?
…
चादर।
2
चित्र देखो। इनका नाम बोलो। हवा चले तो इनका क्या होगा?
बुलबुले। हवा उन्हें दूर उड़ा ले जाएगी।
3
कविता में हवा किससे टकराई?
सूखते कपड़ों से।
4
'फर-फर' जैसी कोई और आवाज़ बोलो।
जैसे: सर-सर, छम-छम, टप-टप।
5
तुम हवा से क्या कराना चाहोगे? बताओ।
कोई भी सही उत्तर।