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कविता: बैलगाड़ी चली मंडी
Sarangi: Lesson 7
Goalएक छोटी कविता सुनना, तुक पहचानना और ताल पर गाना।
New words
बैलगाड़ी · बैलों से खिंचने वाली गाड़ीमंडी · अनाज और सब्ज़ियों का बड़ा बाज़ारघंटी · बजने वाली छोटी चीज़ढोल · पीटकर बजाने वाला बाजातुक · आख़िरी आवाज़ का एक-सा होना
Explanation
यह कविता ध्यान से सुनो। कविता की पंक्तियों के आख़िरी शब्दों में एक-सी आवाज़ आती है। इसे तुक कहते हैं। घंटी और मंडी की तुक मिलती है। राजा और बाजा की भी। ताल देते हुए गाओ।
घन-घन-घन-घन बजती घंटी,
बैलगाड़ी चली है मंडी।
ऊपर बैठा मुन्ना राजा,
बजा रहा है ढोल-बाजा।
Worked examples
कविता की चीज़ें देखो और नाम बोलो।
तुक वाले शब्द सुनो और बोलो।
कविता में 'घ' से शुरू होने वाला शब्द ढूँढो।
Class activity
ताल पर गाओ। दोनों हथेलियों से धीमी ताल दो: ठक-ठक-ठक-ठक। हर पंक्ति ताल के साथ गाओ। पंक्ति के आख़िरी शब्द पर सब ज़ोर से बोलो: घंटी, मंडी, राजा, बाजा।
Practice
1
सुनो। इन दोनों शब्दों के आख़िर में एक-सी आवाज़ है? (हाँ / नहीं)
हाँ। दोनों के आख़िर में 'ना' है।
2
कविता में मुन्ना क्या बजा रहा था?
ढोल-बाजा।
3
चित्र देखो। यह बजाने की चीज़ है। इसका नाम बोलो।
ढोलक।
4
'मंडी' से तुक मिलाओ: घंटी, रोटी या पानी?
घंटी।
5
कविता गाकर सुनाओ।
बच्चा पूरी कविता या कुछ पंक्तियाँ गाए।