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स्कूल का मेला

Week 21 · Lesson 13: मेला · 3 lessons
1

कविता: किताबों की दुकान

Sarangi: Lesson 13
Goalस्कूल के मेले की छोटी कविता सुनना, तुक पहचानना और मेले की बातें करना।
New words
मेला · लोगों के जमा होने की रौनक वाली जगहदुकान · जहाँ चीज़ें बिकती हैंजिल्द · किताब का ऊपरी कवरचित्र · बनी हुई तस्वीरउठाना · हाथ में लेना
Explanation

आज हम स्कूल के मेले की कविता सुनेंगे। मेले में दुकानें सजती हैं और बहुत लोग आते हैं। कविता की हर दो पंक्तियों के अंत की आवाज़ मिलती है। इसे तुक कहते हैं। कविता धीरे-धीरे सुनो और साथ में दोहराओ।

स्कूल के मेले में दुकान सजी,
किताबों पर रंगीन जिल्द चढ़ी।
मैंने एक चित्र वाली किताब उठाई,
उसमें नीली मछली तैरती पाई।

Worked examples
किताबेंमछली
कविता में दिखने वाली चीज़ें देखो।
तुक वाले शब्द सुनो: सजी, चढ़ी। उठाई, पाई।
अगर तुम स्कूल के मेले में जाओ तो कौन-सी दुकान देखना चाहोगे? बताओ।
Class activity

दुकान-दुकान खेल। कोने में तीन दुकानें बनाओ: किताब की, फल की और रंग की। कुछ बच्चे दुकानदार बनें, कुछ ग्राहक। ग्राहक पूछे: 'क्या मिलेगा?' दुकानदार कहे: 'यह लीजिए।' काग़ज़ के टुकड़ों को पैसे मान लो। फिर बारी बदलो।

Practice
1
सुनो। सीमा ने क्या ख़रीदा?

…

2
चित्र देखो। इसका नाम बोलो। इससे क्या करते हैं?
3
कविता में किताबों पर क्या चढ़ी थी?
4
चित्र देखो। मेले में यह कौन-सी दुकान पर मिलेगा? नाम बोलो।
5
दुकानदार से तुम 'क्या चाहिए?' का जवाब किस तरह दोगे? एक वाक्य बोलो।